RTO e-Challan scam: क्या आपके फोन पर RTO से ट्रैफिक चालान का मैसेज आ रहा है? यह साइबर ठगों का जाल हो सकता है! जानिए कैसे बचें फर्जी e-Challan स्कैम से, जहां एक क्लिक से लाखों रुपये उड़ सकते हैं। पुणे में बढ़ते मामलों की पूरी जानकारी और बचाव के टिप्स।

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परिचय: साइबर ठगों का नया हथियार – फर्जी RTO चालान
RTO e-Challan scam: आजकल डिजिटल दुनिया में ट्रैफिक नियमों का पालन आसान बनाने के लिए e-Challan सिस्टम बहुत उपयोगी है, लेकिन इसी का फायदा उठाकर हैकर्स नए-नए धोखाधड़ी के तरीके ईजाद कर रहे हैं। खासतौर पर पुणे और उसके आसपास के इलाकों जैसे पिंपरी-चिंचवड़ में ऐसे फर्जी मैसेज की बाढ़ आ गई है, जो बिल्कुल असली ट्रैफिक नोटिस जैसे लगते हैं। इन पर विश्वास करके क्लिक करने वाले लोग अपने बैंक खातों से हजारों-लाखों रुपये गंवा बैठते हैं। इस लेख में हम इस स्कैम की पूरी डिटेल्स, काम करने का तरीका और बचाव के उपाय बताएंगे, ताकि आप सुरक्षित रहें।
ठग कैसे बिछाते हैं अपना जाल?
साइबर अपराधी चालाकी से ऐसे SMS या WhatsApp मैसेज भेजते हैं, जिनमें स्पीड लिमिट तोड़ने या सिग्नल जंप करने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का उल्लेख होता है। मैसेज में चेतावनी दी जाती है कि चालान का भुगतान न करने पर कानूनी ऐक्शन लिया जाएगा। लोगों को डराने और जल्दी फैसला लेने के लिए एक लिंक या अटैचमेंट जोड़ा जाता है, जिसे खोलने या डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।
ये मैसेज इतने प्रोफेशनल दिखते हैं कि आम आदमी आसानी से फंस जाता है। लेकिन याद रखें, असली RTO या ट्रैफिक पुलिस कभी APK फाइल या संदिग्ध लिंक नहीं भेजती।
क्लिक करते ही फोन पर कब्जा, बैंक से पैसे गायब
जैसे ही आप उस लिंक पर टैप करते हैं या फाइल डाउनलोड करते हैं, आपके डिवाइस में एक खतरनाक वायरस या मैलवेयर घुस जाता है। यह सॉफ्टवेयर हैकर्स को आपके फोन का पूरा कंट्रोल दे देता है। वे दूर से ही आपके बैंकिंग ऐप्स एक्सेस कर लेते हैं, OTP चुरा लेते हैं और यहां तक कि WhatsApp को भी हैक कर लेते हैं।
हाल ही के उदाहरणों में, पुणे के एक व्यक्ति ने 5 लाख रुपये खो दिए, जबकि पिंपरी-चिंचवड़ में एक अन्य शख्स से 2.49 लाख रुपये की ठगी हुई। जांच से पता चला कि कई मामलों में “RTO Traffic Challan.apk” नाम की फाइल भेजी गई थी, जो इंस्टॉल होते ही फोन की सारी प्राइवेसी तोड़ देती है।
स्कैम का फैलाव: WhatsApp से चेन रिएक्शन
एक बार फोन हैक होने के बाद, ठग आपके WhatsApp से वही मैलवेयर फाइल आपके संपर्कों को फॉरवर्ड कर देते हैं। इससे धोखाधड़ी की चेन बहुत तेजी से फैलती है। कुछ मामलों में वे e-SIM बदलने, मोबाइल नंबर अपडेट करने या बैंक ट्रांजेक्शन करने की कोशिश भी करते हैं, बिना आपकी मंजूरी के।
पुणे के सिंहगढ़ रोड क्षेत्र में 5 दिसंबर को एक ऐसा ही केस दर्ज हुआ, जहां फर्जी कॉलर ने खुद को RTO अधिकारी बताकर व्यक्ति को ठगा। इसी तरह चिंचवड़ में एक 45 साल के शख्स का फोन लॉक हो गया और खाते से पैसे निकल गए।
छुट्टियों में क्यों बढ़ता है खतरा?
साइबर विशेषज्ञों ने पाया है कि ऐसे फ्रॉड मैसेज ज्यादातर वीकेंड पर या सरकारी अवकाशों के दौरान आते हैं। वजह साफ है – उस समय बैंक या हेल्पलाइन सेवाएं बंद रहती हैं, जिससे पीड़ित तुरंत मदद नहीं ले पाते। पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर रविकिरण नाले कहते हैं कि ठग इसी मौके का फायदा उठाते हैं।
फर्जी e-Challan से बचने के आसान टिप्स
सुरक्षा सबसे पहले! यहां कुछ जरूरी सलाह हैं:
- कभी भी अनजान SMS या WhatsApp से आई APK फाइल डाउनलोड न करें। सरकारी एजेंसियां ऐसी फाइलें नहीं भेजतीं।
- ट्रैफिक चालान की सच्चाई जांचने के लिए हमेशा आधिकारिक Parivahan वेबसाइट या RTO ऑफिस जाएं।
- अगर गलती से कोई संदिग्ध फाइल खुल जाए, तो तुरंत इंटरनेट बंद करें, ऐप डिलीट करें और फोन को रीसेट करें।
- अपने फोन में एंटीवायरस इंस्टॉल रखें और OTP कभी शेयर न करें।
शिकायत करें, ठगों को पकड़वाएं
अगर आपको ऐसा कोई मैसेज मिले, तो बिना देर किए साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) या लोकल साइबर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें। समय पर शिकायत से न सिर्फ आपका नुकसान रुक सकता है, बल्कि ऐसे गिरोहों पर सख्त कार्रवाई भी हो सकती है। याद रखें, जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है साइबर फ्रॉड के खिलाफ।
इस तरह के स्कैम से बचकर आप अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रख सकते हैं। अगर आपके पास कोई अनुभव है, तो कमेंट्स में शेयर करें और दूसरों को अलर्ट करें!










