Sehore Viral Video: सीहोर जिला अस्पताल पर लगे गंभीर आरोपों के बीच एक पिता ने अपनी प्रीमैच्योर नवजात बेटी का अंतिम संस्कार सड़क किनारे कर दिया। डॉक्टरों की अनुपस्थिति और स्टाफ की असंवेदनशीलता से जुड़ी यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी। जानिए पूरी कहानी और प्रशासन की प्रतिक्रिया।

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घटना का चौंकाने वाला विवरण
Sehore Viral Video: भोपाल के नजदीकी सीहोर जिले में एक ऐसी दुखद घटना घटी है, जो इंसानियत को झकझोर देती है। एक बेबस पिता को अपनी नवजात बेटी का अंतिम संस्कार अस्पताल के बाहर सड़क पर करना पड़ा। यह सब जिला अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण हुआ, जहां डॉक्टरों की कमी और कर्मचारियों के ठंडे रवैये ने परिवार को टूटने पर मजबूर कर दिया। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने इस मामले को पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है।
नवजात की जन्म और मौत की दर्दनाक कहानी
30 दिसंबर 2025 को शाम करीब 4:30 बजे संतोष जाट की पत्नी ममता को सीहोर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 जनवरी 2026 की आधी रात 2:22 बजे उन्होंने एक प्रीमैच्योर बेटी को जन्म दिया, जिसका वजन सिर्फ 900 ग्राम था। जन्म से ही बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी, इसलिए उसे स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में रखा गया। लेकिन इलाज के दौरान सोमवार दोपहर लगभग 3:30 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया।
परिवार का कहना है कि जन्म के समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और एसएनसीयू में तैनात स्टाफ ने बेहद असंवेदनशील तरीके से व्यवहार किया। शव सौंपने के बाद पिता संतोष जाट ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन उन्हें वहां से हटा दिया गया। मजबूरन, उन्होंने सीहोर-भेरूंदा-इछावर रोड पर ‘कृषि’ लिखे एक स्थान के पास लकड़ियों से चिता बनाकर बच्ची को अंतिम विदाई दी।
अस्पताल प्रशासन की सफाई और कार्रवाई
Sehore Viral Video: अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों का खंडन किया है। उनका दावा है कि प्रसूता की जांच महिला डॉक्टर ने की थी और प्रसव प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ द्वारा कराया गया। परिवार ने प्रदर्शन से पहले सिविल सर्जन या किसी वरिष्ठ अधिकारी को सूचित नहीं किया। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल ने संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
वीडियो के वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने जांच की बात कही है। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर कड़ी को उजागर करती है और सवाल उठाती है कि क्या ऐसी लापरवाही से आम आदमी की जान सुरक्षित है?
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल और आगे की उम्मीदें
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की खामियों को दर्शाती है। प्रीमैच्योर बच्चों के लिए बेहतर सुविधाओं की कमी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और स्टाफ की ट्रेनिंग जैसी समस्याएं बार-बार सामने आती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने लोगों में गुस्सा पैदा किया है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है। उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
यदि आप ऐसी घटनाओं पर अपडेट चाहते हैं या स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी, तो कमेंट में बताएं।










