World Largest Shivling: बिहार के केसरिया में विराट रामायण मंदिर के लिए पहुंचा दुनिया का सबसे बड़ा 33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी सहस्त्रलिंगम। 17 जनवरी 2026 को माघ कृष्ण चतुर्दशी पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा और पवित्र जलों से महाभिषेक। जानिए इसकी पूरी यात्रा, विशेषताएं और धार्मिक महत्व!

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आस्था की अनोखी यात्रा: तमिलनाडु से बिहार तक 2500 किमी का सफर
World Largest Shivling in Bihar: भगवान शिव के भक्तों के लिए यह पल बेहद खास है! दुनिया का सबसे बड़ा माने जाने वाला शिवलिंग अब बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया में विराट रामायण मंदिर परिसर में पहुंच चुका है। यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 21 नवंबर 2025 को रवाना हुआ था और लगभग 45 दिनों की चुनौतीपूर्ण यात्रा तय कर कई राज्यों से गुजरता हुआ बिहार आया। इस दौरान आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों में भक्तों ने इसका भव्य स्वागत किया।
गोपालगंज में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रास्तों को फूलों, मालाओं और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया। भक्तों ने चंदन तिलक लगाया, आरती उतारी और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। गोपालगंज से आगे खजुरिया, हुसैनी होते हुए यह केसरिया पहुंचा, जहां हजारों लोग दर्शन के लिए जुटे। इस यात्रा ने दक्षिण से उत्तर तक भारत की सांस्कृतिक एकता को फिर से जीवंत कर दिया।
17 जनवरी 2026: क्यों इतनी खास है यह तिथि और क्या होगा आयोजन?
यह विशाल शिवलिंग 17 जनवरी 2026 को माघ कृष्ण चतुर्दशी के पावन दिन विराट रामायण मंदिर में विधिवत स्थापित किया जाएगा। यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव पहली बार शिवलिंग रूप में प्रकट हुए और उनकी पूजा हुई थी।
आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं:
- पीठ पूजा, हवन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापना।
- हरिद्वार, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर, प्रयागराज और सोनपुर जैसी पवित्र जगहों के जल से महाभिषेक।
- हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की भव्य व्यवस्था।
- बाद में ब्लैक ग्रेनाइट से नंदी की मूर्ति भी स्थापित की जाएगी।
महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव सायन कुणाल के अनुसार, 15 जनवरी तक सभी तैयारियां पूरी हो जाएंगी। यह आयोजन हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा और बिहार को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर नई पहचान देगा।
शिवलिंग की अद्भुत विशेषताएं: 10 साल की मेहनत का नतीजा
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में कुशल शिल्पकारों ने पूरे 10 साल की कड़ी मेहनत से इस शिवलिंग को तराशा है। यह पूरी तरह एक ही ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर (मोनोलिथ) से बना है, जो इसे और भी दुर्लभ बनाता है।
- ऊंचाई और परिधि: 33 फीट
- वजन: 210 मीट्रिक टन (2 लाख किलो से ज्यादा!)
- खासियत: इसमें 1008 छोटे-छोटे सहस्त्रलिंगम उकेरे गए हैं, इसलिए इसे ‘सहस्त्रलिंगम’ कहा जा रहा है। इसका अभिषेक 1008 शिवलिंगों के अभिषेक के बराबर माना जाता है।
इतने बड़े आकार का मोनोलिथ शिवलिंग दुनिया में पहली बार बना है, जो प्राचीन भारतीय शिल्पकला की जीती-जागती मिसाल है। इसे उठाने के लिए भोपाल से 750 टन क्षमता वाली ‘बाहुबली’ क्रेन भी मंगाई गई है।
विराट रामायण मंदिर: दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर
यह शिवलिंग विराट रामायण मंदिर के शिव मंदिर में स्थापित होगा, जो पटना के महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा बनाया जा रहा है। 120 एकड़ में फैला यह परिसर पूरा होने पर दुनिया का सबसे बड़ा रामायण थीम वाला मंदिर बनेगा।
- मुख्य मंदिर: 1080 फीट लंबा, 540 फीट चौड़ा।
- कुल 22 मंदिर और 18 भव्य शिखर।
- मुख्य शिखर की ऊंचाई: 270 फीट।
- निर्माण पूरा होने की समयसीमा: 2030 तक।
यह मंदिर न केवल धार्मिक केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। दिवंगत आचार्य किशोर कुणाल का यह सपना अब साकार हो रहा है।
शिव भक्तों, अगर आप इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो 17 जनवरी को केसरिया जरूर पहुंचें। हर-हर महादेव! 🚩🙏










